भाई का साथ
भाई वो साथी, जो हर राह में संग चले,
हर मुश्किल में हिम्मत बनकर खड़ा रहे।
उसके कंधे पर रखा जब भी सिर,
दुनिया के हर ग़म से मिलती राहत फिर।
वो लड़ाई-झगड़े का बचपन का दौर,
पर दिल से जुड़ा वो स्नेह का छोर।
हर डांट के पीछे छुपा था प्यार,
भाई के बिना अधूरी हर त्यौहार।
वो ढाल बना जब वक्त ने आजमाया,
अपनी मुस्कान में हर दर्द को छिपाया।
उसकी बातों में था भरोसे का संसार,
भाई, तू है तो जीवन में बहार।
हर सपना तेरा भी मेरा बन जाता,
तेरी जीत पर दिल खुशी से मुस्काता।
तेरा हर बलिदान मुझे सिखाता,
कैसे सच्चा रिश्ता निभाया जाता।
भाई, तू सिर्फ रिश्ता नहीं, एक दुआ है,
तेरे बिना जीवन में क्या मज़ा है।
तेरा प्यार, तेरी हिम्मत साथ रहे,
भाई, तू हरदम मेरा अभिमान रहे।
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